कविता : तुमने कहा था

http://hindi.webdunia.com/hindi-poems/hindi-poem-118041800022_1.html

तुमने कहा था साथ रखना,
सब होगा अच्छा विश्वास रखना।
कोई बैरी नहीं सपनों का,
स्वप्न मगर कुछ खास रखना।
जिससे हिल जाए घर की दीवारें,
नहीं कोई ऐसी बात रखना।
 
कांटों से चुभते जीवन में,
हंसने का उल्लास रखना।
अंधेरी रातों का डर नहीं,
अंतर केवल प्रकाश रखना।
तुमने कहा था कि पतझड़ में,
बसंत आने की आस रखना।

 

Advertisements

राम जी

Lehrein_Girija

सपने तो दिए हैं, अब उड़ान देना राम जी
विश्राम से पहले ऊँचा, मुकाम देना राम जी
सपने तो दिए हैं, अब उड़ान देना राम जी

तुम्हीं हमें दुनिया में लाए, तुमने ही रास्ते दिखाए
चौड़ा हो सीना तुम्हारा, ऐसी पहचान देना राम जी
सपने तो दिए हैं, अब उड़ान देना राम जी

अजब मेले लगाए, गजब करतब दिखाए
बढ़ती ही जाए हरदम, वो दुकान देना राम जी
सपने तो दिए हैं, अब उड़ान देना राम जी

जो काम दिए तुमने, हो जाएं पूरे हमसे
हमको यथोचित प्यार और सम्मान देना राम जी
सपने तो दिए हैं अब उड़ान देना राम जी

रास्ते में चोर लुटेरे, हम आसरे पे तेरे
अचूक जाए तीर, ऐसी कमान देना राम जी
सपने तो दिए हैं, अब उड़ान देना राम जी

सपने तो दिए हैं, अब उड़ान देना राम जी
विश्राम से पहले ऊँचा, मुकाम देना राम जी
सपने तो दिए हैं, अब उड़ान…

View original post 3 more words

चलो बुलावा आया है लिरिक्स

Lehrein_Girija

दोहा: माता जिनको याद करे, वो लोग निराले होते हैं।

माता जिनका नाम पुकारे, किस्मत वाले होतें हैं।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
ऊँचे पर्वत पर रानी माँ ने दरबार लगाया है।
सारे जग मे एक ठिकाना, सारे गम के मारो का,
रास्ता देख रही है माता, अपने आंख के तारों का।
मस्त हवाओं का एक झोखा यह संदेशा लाया है।
जय माता की कहते जाओ, आने जाने वालो को,
चलते जाओ तुम मत देखो अपने पाँव के छालों को।
जिस ने जितना दर्द सहा है, उतना चैन भी पाया है।
वैष्णो देवी के मन्दिर मे, लोग मुरादे पाते हैं,
रोते रोते आते है, हस्ते हस्ते जाते हैं।
मैं भी मांग के देखूं, जिस ने जो माँगा वो पाया है।
मैं तो भी एक माँ हूं माता,
माँ ही माँ को पहचाने।
बेटे का दुःख क्या होता है और कोई यह क्या जाने।
उस का खून मे…

View original post 60 more words

यादें

 

आवारा बादल सी
गलियों में मन के फिरती
आ जाती हैं यादें

चलते हुए डगर में
चुपके से पकड़े
दामन को जैसे कांटे

कुछ हाथ लग जाए
बरसों से बंद ट्रंक
आज खोलने की साधे

पुरानी किसी गुफा में
रोशनी कर रही हो
अंधेरे से कोई वादे

बचपन के बाग में
भंवरे कर रहे हो
तितली से फूल सांझे

ऊँची पहाड़ी वाले
मंदिर में मन्नतों के
लटके हों जैसे धागे

दुख या खुशी मेंकभी
बरसे आंखो से
या गरजन सी हो बातें

आवारा बादल सी
गलियों में मन के फिरती
आ जाती हैं यादें

क्या होता जो गम न होता ?

http://hindi.webdunia.com/hindi-poems/hindi-poem-on-sadness-118022100069_1.html

क्या होता जो इस दुनिया में गम न होता?
सच पूछो तब हंसने का भी मौसम न होता।
कांटों की जो सेज न होती, फूल कहां पर सोते?
जो ये काली रात न होती, ओंस कहां पिरोते?
सुबह सूर्य के दर्शन कर फिर क्यों इतना इतराते?
इतना खिला-खिला तब कोई उपवन न होता।
सच पूछो तब हंसने का भी मौसम न होता,
क्या होता जो इस दुनिया में गम न होता?
प्यास से न कंठ तरसते पानी अमृत क्यों बनता?
चिलचिलाती धूप न होती, बादल क्यों बरसता?
गरज-बरसकर जो धरती से अंबर न मिलता,
हरा-भरा धरती पर इतना जीवन न होता।
सच पूछो तब हंसने का भी मौसम न होता।
क्या होता जो इस दुनिया में गम न होता?
विरह का जो दर्द न होता मिलना किसको कहते?
रातों की जो नींद न उड़ती थककर कैसे सोते?
सुनहरे सपनों को तब किसके नयन पिरोते?
नित नूतन तब मानव का मन न होता।
सच पूछो तब हंसने का भी मौसम न होता।
क्या होता जो इस दुनिया में गम न होता?
देखी जो हार न होती जीत खुशी न देती,
सुख के आंसू कैसे सहती, जो आंख कभी न रोती।
खुद न जलती लौ तो फिर तम कैसे हर लेती?
रात न होती, दिन भी इतना उज्ज्वल न होता।
सच पूछो तब हंसने का भी मौसम न होता।
क्या होता जो इस दुनिया में गम न होता?

आओ बसंत

आओ बसंत, छाओ बसंत
पुलकित हो मन, आनंद मगन

फूलों के रंग, परागों के संग
सरोवरों में बन कर कमल

ले कर सुगन्ध, आंगन भवन
बहकी चले, शीतल पवन

हर ओर करें भंवरे गुंजन
बागों में हो कोयल के स्वर

फूटे कपोल, सुन्दर चमन
सरसों के खेत, मंगल शगुन

तोतों के झुंड, दिखते गगन
बौरों में छिप बैठे अनंग

धरती सजे बनकर दुल्हन
उत्सव में हो हर एक कण

सूर्य क्षितिज में गया निकल (Published in Rupayan 1.12.17)

Lehrein_Girija

पाने को एक बेहतर कल

उद्यम की ली है राह पकड़

 

इन राहों की नींदों को

बोला कुछ विश्राम कर

 

भेदने रात का कम्बल

सूर्य क्षितिज में गया निकल

 

पंछी ने उड़ने से पहले

समेटे अपने सारे पर

 

जड़ की जीवन-इच्छा ने

काट डाले हैं पत्थर

 

तीव्र खोज के बाद कुदरत

दे देती मरूभूमि में जल

View original post